मंदिर की सीढ़ी चढ़-चढ़ आऊँ,
लेकर दिल की पुकार,
तेरे दर पे झोली फैलाऊँ,
दे दे अपना प्यार।
बस तेरा ही दरबार,
बस तेरा ही दरबार,
मेरी सांसों का तू मालिक,
तू ही मेरा संसार।।
जब-जब दुनिया ने ठुकराया,
तेरा ही दर याद आया,
तेरी रहमत की इक नज़र ने,
सूना दिल महकाया।
तेरे नाम का जाम पिया है,
तेरे रंग में दिल रंगा है,
तेरे दर से खाली जाए,
ऐसा कौन यहाँ आया है।
बस तेरा ही दरबार,
बस तेरा ही दरबार,
मेरी सांसों का तू मालिक,
तू ही मेरा संसार।।
तेरी चौखट चाँद सितारा,
तेरा नाम सहारा,
तेरी कृपा के आगे दाता,
फीका जग सारा।
मैं तो तेरी धुन में खोया,
तेरा बनकर सब कुछ पाया,
तेरी याद ने मेरे मन में,
प्रेम का दीप जलाया।
बस तेरा ही दरबार,
बस तेरा ही दरबार,
मेरी सांसों का तू मालिक,
तू ही मेरा संसार।।
हाथ उठे तो नाम तेरा हो,
लब पे तेरा प्यार,
तेरी महिमा गाते-गाते,
भर जाए दरबार।
एक इशारा कर दे मालिक,
बदल जाए तक़दीर,
तेरे चरणों में मिल जाए,
जीवन की जागीर।
बस तेरा ही दरबार,
बस तेरा ही दरबार,
मेरी सांसों का तू मालिक,
तू ही मेरा संसार।।
बस तेरा ही दरबार,
बस तेरा ही दरबार,
मेरी सांसों का तू मालिक,
तू ही मेरा संसार।।
मंदिर की सीढ़ी चढ़-चढ़ आऊँ,
लेकर दिल की पुकार,
मंदिर की सीढ़ी चढ़-चढ़ आऊँ,
लेकर दिल की पुकार,
मंदिर की सीढ़ी चढ़-चढ़ आऊँ,
लेकर दिल की पुकार,
तेरे दर पे झोली फैलाऊँ,
दे दे अपना प्यार।
बस तेरा ही दरबार,
बस तेरा ही दरबार,
मेरी सांसों का तू मालिक,
तू ही मेरा संसार।।
जब-जब दुनिया ने ठुकराया,
तेरा ही दर याद आया,
तेरे दर पे झोली फैलाऊँ,
दे दे अपना प्यार।
बस तेरा ही दरबार,
बस तेरा ही दरबार,
मेरी सांसों का तू मालिक,
तू ही मेरा संसार।।