रब्बा ओ रब्बा...
रब्बा हाय रब्बा...
नींदरा नैयो आंदियाँ...
रब्बा ओ रब्बा...
रब्बा ओ रब्बा...
रब्बा हाय रब्बा...
तेरे बिन सजणा वे...
नींदरा नैयो आंदियाँ...
दिल दा हाल किसे नूं दस्सां,
साहां विच बस्सी ओ...
रातां सारी जाग के कट्दां,
यादां विच हस्सी ओ...
खिड़की उत्ते चन्न वी आवे,
हाल मेरा पढ़ न पावे...
टूटे दिल दी इस दुनिया विच,
कोई दर्द न समझ पावे...
ओह तां चैन ले गई,
अखियां रो रो थक गईयां...
दिल नूं समझावां किन्ज़ मैं,
नींदरा नैयो आंदियाँ...
जिथे जावां ओहदी खुशबू,
राहां विच मिल जावे...
हर इक चेहरे दे विच सजणा,
चेहरा ओहदा दिस जावे...
सवेरा आवे, शाम वी ढल जावे,
दिल फिर ओथे अटक जावे...
जद वी सोचना भुल्लां उसनूं,
नाम ओहदा ही आ जावे...
ओह तां चैन ले गई,
अखियां रो रो थक गईयां...
दिल नूं समझावां किन्ज़ मैं,
नींदरा नैयो आंदियाँ...
रब्बा...
दस्स तूं एहो जुदाई क्यों...
रब्बा...
दिल नूं एहो सजाई क्यों...
हाले वी ओहदे कदमां दी,
आहट सुननी चाहुंदा हां...
हाले वी ओहदे मुड़ आऊण दा,
सुपना वेखदा रहंदा हां...
रब्बा ओ रब्बा...
रब्बा हाय रब्बा...
नींदरा नैयो आंदियाँ...
रब्बा ओ रब्बा...
तेरे बिन सजणा वे...
साह वी बोझ लगदियाँ...
रब्बा ओ रब्बा...
नींदरा नैयो आंदियाँ...