राधा ढूँढ रहीऽऽ, किसी ने मेरा श्याम देखा,
किसी ने मेरा श्याम देखा, किसी ने मेरा श्याम देखा।
ब्रज की गलियों में पूछ रही,
किसी ने मेरा श्याम देखा...
कहीं बजे मुरली की तान,
कहीं सुनाई पायल की झंकार,
कहीं दिखे पीतांबर की छाया,
कहीं मिले वो बाँके बिहारी।
फूलों से पूछा, भँवरों से पूछा,
पूछा यमुना की लहरों से,
किस ओर गए मेरे नंदलाला,
पूछा वृंदावन की गलियों से।
राधा ढूँढ रहीऽऽ, किसी ने मेरा श्याम देखा,
अरे किसी ने मेरा श्याम देखा...
मोर मुकुट की चमक कहाँ है,
मुरली वाली धुन कहाँ है,
कानों में वो कुंडल झिलमिल,
मुख पर वो मुस्कान कहाँ है।
सखियाँ हँसकर कहने लगीं,
श्याम मिले तो बतला देना,
हम भी संग में चलेंगे राधे,
मुरली की धुन सुनवा देना।
राधा ढूँढ रहीऽऽ, किसी ने मेरा श्याम देखा...
यमुना तट पर आई राधा,
लहरों ने कुछ बात बताई,
मंद-मंद मुस्काई यमुना,
बोली श्याम की याद तो आई।
कदंब की डाली झूम उठी,
बंसी की खुशबू आई रे,
राधा के चेहरे पर देखो,
फिर से हँसी खिल आई रे।
राधा बोली — सच-सच कहना,
कहाँ छुपे हैं मेरे मोहन?
यमुना बोली — आँखें मूँदो,
पास खड़े हैं तेरे मोहन।
राधा ढूँढ रहीऽऽ, किसी ने मेरा श्याम देखा,
किसी ने मेरा श्याम देखा...
कभी वो मिलते फूलों में,
कभी छुपे हैं तितली में,
कभी हवा बन छूकर जाते,
कभी बसे हैं बाँसुरी में।
जिस ओर देखे राधा प्यारी,
वहीं खड़ा है नंदकुमार,
ब्रज की रज भी नाम पुकारे,
वृंदावन हर पल मुस्काए।
राधा ढूँढ रहीऽऽ, किसी ने मेरा श्याम देखा,
अरे किसी ने मेरा श्याम देखा...
अरे सखी, मुझे इतना बता दे,
कहाँ मिलेगा मेरा साँवरा?
सखी हँसकर बोली राधे,
तेरे मन में है वो बाँवरा।
जिसको ढूँढे ब्रज की गलियाँ,
जिसको ढूँढे यमुना किनारा,
तेरे प्रेम में बंधा हुआ है,
वो ही तो है श्याम तुम्हारा।
राधा ढूँढ रही थी जिसको,
वो तो पास खड़ा मुस्काता,
राधा ने जब नाम पुकारा,
श्याम ने मुरली फिर बजाई।
राधा ढूँढ रहीऽऽ, किसी ने मेरा श्याम देखा,
हाँ, मैंने अपने मन में देखा,
अपना प्यारा श्याम ही देखा।
मुरली बजे तो राधा मुस्काए,
श्याम मिले तो ब्रज मुस्काए,
राधा ढूँढ रही थी जिसको,
वो हर धड़कन में मिल जाए।
किसी ने मेरा श्याम देखा...
किसी ने मेरा श्याम देखा...