मुखड़ा / Hook
तू मेरा होकर भी मेरा न हुआ,
मैं तेरा होकर भी ख़ुद का न रहा…
तूने इश्क़ को बस इश्क़ कहा,
मैंने इश्क़ में ख़ुद को खो दिया…
कोरस
तू किनारा था, मैं दरिया हुआ,
तू गुज़र गया, मैं ठहरा रहा…
तूने बस एक शख़्स खोया था,
मैंने अपना ही वजूद खो दिया…
तू मेरा होकर भी मेरा न हुआ,
मैं तेरा होकर भी ख़ुद का न रहा…
अंतरा 1
तेरी ख़ामोशी को पढ़ता रहा,
हर ख़ामोश लफ़्ज़ में तेरा नाम था…
तू सामने था, मगर दूर रहा,
मेरे चारों तरफ़ तेरा ही गुमान था…
तूने रातों को बस रातें जाना,
मैंने रातों में तुझको जिया…
तूने आँसू समझे पानी को,
मैंने हर क़तरे में दर्द पिया…
प्री-कोरस
तूने जिस राह से मुँह मोड़ा,
मैं उसी राह पे चलता रहा…
तूने जिस रिश्ते को ख़त्म कहा,
मैं उसे रूह में रखता रहा…
कोरस
तू किनारा था, मैं दरिया हुआ,
तू गुज़र गया, मैं ठहरा रहा…
तूने बस एक शख़्स खोया था,
मैंने अपना ही वजूद खो दिया…
अंतरा 2
तेरे जाने से घर ख़ाली नहीं,
मेरी रूह का शहर वीरान हुआ…
लोग कहते रहे—वक़्त भर देगा,
वक़्त गुज़रा, मगर दर्द जवान हुआ…
तूने यादों को राख कर दिया,
मैंने राख में तेरा चेहरा पढ़ा…
तूने ख़ुद को मुझसे आज़ाद किया,
मैंने ख़ुद को तेरे नाम कर दिया…
प्री-कोरस 2
तूने पूछा—इश्क़ में क्या मिला?
मैंने हँसकर कहा—कुछ भी नहीं…
फिर आँखों ने सच कह दिया,
तेरे सिवा मेरा कुछ भी नहीं…
कोरस
तू किनारा था, मैं दरिया हुआ,
तू गुज़र गया, मैं ठहरा रहा…
तूने बस एक शख़्स खोया था,
मैंने अपना ही वजूद खो दिया…
अंतरा 3
तूने मौसम बदलते देखे,
मैंने मौसम में तेरा इंतज़ार किया…
तूने एक कहानी छोड़ दी,
मैंने उसको अपना संसार किया…
तूने मेरा नाम भुला दिया,
मैंने तेरा नाम दुआ कर लिया…
तूने मुझे अपना कहा भी नहीं,
मैंने तुझे अपना ख़ुदा कर लिया…
ब्रिज
अब न तुझसे कोई शिकवा है,
न लौटने की कोई आस रही…
तू मेरी क़िस्मत में था या नहीं,
तेरी कमी मगर मेरे पास रही…
मैंने जाना—इश्क़ जीत नहीं,
इश्क़ तो ख़ुद को हारना है…
जिसे पाना मुमकिन ही न हो,
उसी को उम्रभर प्यारना है…
Final Hook
तू मेरा होकर भी मेरा न हुआ,
मैं तेरा होकर भी ख़ुद का न रहा…
तूने इश्क़ को बस इश्क़ कहा,
मैंने इश्क़ में ख़ुद को खो दिया…
तू किनारा था…
मैं दरिया हुआ…
तू गुज़र गया…
मैं ठहरा रहा…
तूने बस एक शख़्स खोया था…
मैंने अपना ही वजूद खो दिया…
Outro — दोनों आवाज़ें
तू मेरा होकर भी मेरा न हुआ…
मैं तेरा होकर भी ख़ुद का न रहा…
तूने इश्क़ को बस इश्क़ कहा…
मैंने इश्क़ में…
ख़ुद को खो दिया…